155 Love Shayari

अगर तुम न होते तो गजल कौन कहता,
तुम्हारे चहरे को कमल कौन कहता,
ये तो करिश्मा है मोहब्बत का,
वरना पत्थर को ताजमहल कौन कहता।


अगर ताल्लुक हो तो रूह से रूह का हो,
इल तो अक्सर एक दूसरे से भर जाते हैं।


गलती हुई है हमसे कि,
उसे जान से ज्यादा चाहने लगे।
क्या पता था, कि मेरी इतनी परवाह,
उसे लापरवाह कर देगी।


कोई अजनबी ख़ास हो रहा है,
लगता है फिर प्यार हो रहा है |


कोई ग़ज़ल सुना कर क्या करना,
यूँ बात बढ़ा कर क्या करना।
तुम मेरे थे, तुम मेरे हो,
दुनिया को बता कर क्या करना।
तुम साथ निभाओ चाहत से,
कोई रस्म निभा कर क्या करना।
तुम खफ़ा भी अच्छे लगते हो,
फिर तुमको मना कर क्या करना।


मैं तुम्हारे संग अपनी जिंदगी गुजारना चाहती हूँ, वक्त नही।


आप जब तक रहेंगे आँखों में नजारा बनकर,
रोज आयेंगे मेरी दुनिया में उजाला बनकर।


मोहब्बत जीत जाएगी,
अगर तुम मान जाओ तो।
मेरे दिल में तुम ही तुम हो,
अगर तुम जान जाओ तो।


तू तोड़ दे वो कसम जो तूने खाई है,
कभी कभी याद करने में क्या बुराई है,
तुझे याद किये बिना रहा भी तो नहीं जाता,
तूने दिल में जगह जो ऐसी बनाई है |


प्यार की हद को समझना,
मेरे बस की बात नहीं,
दिल की बातों को छुपाना,
मेरे बस की बात नहीं,
कुछ तो बात है तुझमें
जो यह दिल तुमपे मरता है,
वरना यूँ ही जान गँवाना,
मेरे बस की बात नहीं।


तेरी मोहब्बत ने हमे बेनाम कर दिया,
हर ख़ुशी से हमे अंजान कर दिया,
हमने तो नही चाहा था हमे भी मोहब्बत हो,
लेकिन तेरी पहली नज़र ने मुझे नीलाम कर दिया।


नफरतों के जहाँ में हमको
प्यार की बस्तियां बसानी हैं,
दूर रहना कोई कमाल नहीं
पास आओ तो कोई बात बने।


दास्तां है ये प्यार की,
ना जाने कौन समझता है।
दो दिल मिल ही जाते हैं,
जब प्यार सच्चा होता है।


तू मिल गयी है तो मुझ से नाराज़ है खुदा,
कहता है की तू अब कुछ मांगता नहीं है |


नहीं पसंद मोहब्बत में मिलावट मुझको,
अगर वो मेरा है तो ख्वाब भी बस मेरे देखे।


मुझे बस तू चाहिये, ये मत पूछ क्यों चाहिये।


एक लफ्ज़ मोहब्बत का इतना सा फ़साना है,
सिमटे तो दिले-ए-आशिक बिखरे तो ज़माना है।


निगाहें नाज करती है,
फलक के आशियाने से।
रूठ जाता है खुदा भी,
किसी का दिल दुखाने से।


तुम्हारी खुशियों के ठिकाने बहुत होंगे मगर,
हमारी बेचैनियों की वजह बस तुम हो |


रुके तो चाँद चले तो हवाओं जैसा है,
वो शख्स धूप में भी छाँव जैसा है।


काश एक दिन ऐसा भी आये हम दोनों एक दुज़े में समा जायें,
सिर्फ एक तुम हो और एक हम हो और वक्त ठहर जायें।


प्यार मोहब्बत आशिकी ये बस अल्फाज थे
मगर जब तुम मिले तब इन अल्फाजो को मायने मिले।


उस शख्स से मोहब्बत करना भी,
हर दिन मरने जैसा है।
जिसे आपके होने या नहीं होने से,
कोई फर्क नहीं पड़ता।


तन्हाई में मुस्कराना भी इश्क़ है,
और इस बात को छुपाना भी इश्क़ है |


उनसे कह दो किसी और से मोहब्बत की ना सोचें,
एक हम ही काफी हैं उन्हें उम्र भर चाहने के लिए।


पहली मोहब्बत में दिल जिसे चुनता है,
वो अपना हो न हो लेकिन दिल उसी को चुनता है।


मैं दीवाना हूँ तेरा मुझे इनकार नहीं,
कैसे कह दूँ कि मुझे तुमसे प्यार नहीं,
कुछ शरारत तो तेरी नजरों में भी थी,
मैं अकेला ही तो इसका गुनहागार नहीं।


मोहब्बत के लिए एक
जिंदगी कम पड़ गयी होगी।
तभी तो सात जन्मों का
खुदा ने बंधन कर दिया।


पूछते थे ना कितना प्यार है हमें तुमसे,
लो अब गिन लो ये बाऱिश की बूंदों |


क्यूँ करते हो मुझसे इतनी ख़ामोश मोहब्बत,
लोग समझते हैं इस बदनसीब का कोई नहीं।


हम पीना चाहते हैं उनकी निगाहों से,
हम जिना चाहते हैं उनकी पन्हाओं में,
हम चलना चाहते हैं उनकी राहो में,
हम मरना चाहते हैं उनकी बाहों में।


मैं नींद का शौकीन ज्यादा तो नही,
लेकिन तेरे ख्वाब ना देखूँ तो गुजारा नही होता।


कुछ यूँ ही चलेगा, तेरा-मेरा रिश्ता उम्र भर,
मिल गए तो बातें लम्बी, और अगर
ना मिले तो यादें लंबी।


मोहब्बत भी शराब के नशे के जैसी है दोस्तों,
करे तो मर जाए और छोड़े तो किधर जाएँ |


दिल की हर बात जमाने को बता देते हैं,
अपने हर राज पर से परदा उठा देते हैं,
आप हमें चाहें न चाहें इसका गिला नहीं,
हम जिसे चाहें उस पर जान लुटा देते हैं।


सपना कभी साकार नही होता,
मोहब्बत का कोई आकार नही होता,
चाहे कुछ भी हो जाये इस दुनिया में,
लेकिन दोबारा किसी से सच्चा प्यार नही होता।


हाथ पर हाथ रखा उसने तो मालूम हुआ,
अनकही बात को किस तरह सुना जाता है।


तजुर्बा कहता है,
मोहब्बत से किनारा कर लूँ।
और दिल कहता है,
ये तजुर्बा दुबारा कर लू।


मेरी मोहब्बत की हद ना तय कर पाओगे तुम,
तुम्हे साँसों से भी ज्यादा मुहब्बत करते है हम |


ये मत कहना कि तेरी याद से रिश्ता नहीं रखा,
मैं खुद तन्हा रहा मगर दिल को तन्हा नहीं रखा,
तुम्हारी चाहतों के फूल तो महफूज़ रखे हैं,
तुम्हारी नफरतों की पीर को ज़िंदा नहीं रखा।


काश मिल जाये कोई हमसफ़र मुझे भी ऐसा,
जो गले लगा कर कहे रोया मत करो मुझे भी तकलीफ होती है।


अच्छा लगता है तेरा नाम मेरे नाम के साथ,
जैसे कोई खुबसूरत जगह हो हसीन शाम के साथ।


रात को रो कर सोना, सुबह उठकर
किसी को महसूस ना होने देना।
मोहब्बत ये भी हुनर सीखा देती है।


मेरे होठों पर लफज भी अब तेरी तलब लेकर आते है,
तेरे जिक्र से महकते हैं तेरे सजदे में बिखर जाते है |


वो मुझ तक आने की राह चाहता है,
लेकिन मेरी मोहब्बत का गवाह चाहता है,
खुद आते जाते मौसमों की तरह है,
और मुझसे मोहब्बत की इन्तहा चाहता है।


तू पूछ लेना सुबह से न यकीन हो तो शाम से,
ये दिल धड़कता है सिर्फ तेरे ही नाम से।


लफ्जों की तिजारत को जरा संभल के करना तुम,
इश्क लफ्ज़ है लेकिन ये अक्सर हो भी जाता है।


इतनी मोहब्बत ना सिखा ऐ खुदा कि,
तुझसे ज्यादा उस पे ऐतबार हो जाए।
दिल तोड़ के जाए वो मेरा,
और तू मेरा गुनहगार हो जाए।


मैंने अपनी जान बचा के रखी है अपनी जान के लिए,
इतना प्यार कैसे हो गया एक अनजान के लिए |


खुदा से मांगते तो मुद्दतें गुजर गयीं,
क्यूँ न मैं आज उसको उसी से माँग लूँ।


कौन कहता है प्यार सिर्फ रुलाता है, अगर दिल से निभाओ तो वही प्यार जिंदगी बन जाता है।


तुम मुझे कभी दिल से कभी आँखों से पुकारो,
ये होंठों के तकल्लुफ तो ज़माने के लिए हैं।


हकीकत में अधूरा है लेकिन,
ख्वाबों में मुकम्मल सा लगता है,
इश्क हमारा।


तुम्हे नींद नहीं आती तो कोई और वजह होगी,
अब हर ऐब के लिए कसूरवार इश्क़ तो नहीं |


जी करता है उसे मुफ्त में जान दे दूँ,
इतने मासूम खरीदार से क्या लेना।


इस जिंदगी से कोई दुश्मनी नही मेरी, बस एक जिद है तेरे बिना एक पल नही रहना है ।


दिल की धड़कन और मेरी सदा है वो,
मेरी पहली और आखिरी वफ़ा है वो,
चाहा है उसे चाहत से भी बढ़ कर,
मेरी चाहत और चाहत की इन्तहा है वो।


मोहब्बत तो रूह में उतरा हुआ,
एक रिश्ता है।
बातें या मुलाकातें कम होने से,
मोहब्बत कम नहीं होती।


वजह नफरतों की तलाशी जाती है,
मोहब्बत तो बिन वजह ही हो जाती है |


आये हो आँखों में तो कुछ देर तो ठहर जाओ,
एक उम्र लग जाती है एक ख्वाब सजाने में।


जब किसी से मोहब्बत करना तो इतना करना जब उसे मोहब्बत मिले तो तुम याद आओ।


दिल के बाज़ार में दौलत नही देखी जाती।
प्यार अगर हो जाये तो सूरत नही देखी जाती।


ये हकीकत है के होता है असर बातों में,
तुम भी खुल जाओगे दो-चार मुलाकातों में,
तुमसे सदियों की वफाओं का कोई नाता न था,
तुनसे मिलने की लकीरें थी मेरे हाथों में।


चेहरे का रौनक उड़ जाएगी,
हँसते रहिये।
जब तक इश्क नहीं होता।


मैं लब हूँ पर मेरी बात तुम हो,
और में तब हूँ जब मेरे साथ तुम हो |


क्या हसीन इत्तेफाक़ था तेरी गली में आने का,
किसी काम से आये थे और किसी काम के ना रहे।


जब ख्याल तेरा मेरे दिल में आता रहा,
तो बहुत देर तक मेरा दिल जोर से धड़कता रहा,
जो तेरा जिक्र कल मेरे घर में छिड़ गया,
तो बहुत देर तक मेरा घर महकता रहा।


तू मुझे क्यों इतना याद आता है,
तू मुझे क्यों इतना तड़पाता है,
माना के ज़िन्दगी है सिर्फ तेरे लिए,
फिर मुझे तू क्यों इतना रुलाता है।


कोई कहता है प्यार नशा बन जाता है,
कोई कहता है प्यार सजा बन जाता है,
पर प्यार करो अगर सच्चे दिल से,
तो प्यार जीने कि बजह बन जाता है।


दुनिया को नफरत का यकीन नहीं दिलाना पड़ता,
मगर लोग मोहब्बत का सुबूत जरुर मांगते है।


तेरे मुस्कुराने का असर सेहत पर होता है,
लोग पूछ लेते हैं… दवा का नाम क्या है।


नहीं जो दिल में जगह तो नजर में रहने दो,
मेरी हयात को तुम अपने असर में रहने दो,
मैं अपनी सोच को तेरी गली में छोड़ आया हूँ,
मेरे वजूद को ख़्वाबों के घर में रहने दो।


अपनी मोहब्बत में बस इतना सा उसूल है,
जब तू कुबूल है तो तेरा सब कुछ कुबूल है।


माना कि तू नहीं है मेरे सामने
पर तू मेरे दिल में बसता हैं
मेरे हर दुख में मेरे साथ होता है
और हर सुख में मेरे साथ हसता है


न समेट सकोगे क़यामत तक जिसे तुम,
कसम तुम्हारी तुम्हे इतनी मोहब्बत करते हैं।


ना जाने कौन-सा ऐसा छुपा हुआ रिश्ता है तुमसे,
हजारों अपने हैं। पर याद तुम ही आते हो।


इश्क़ तेरी इन्तेहाँ इश्क़ मेरी इन्तेहाँ,
तू भी अभी ना-तमाम मैं भी अभी ना-तमाम।


वो आँखों से अपनी शरारत करते हैं
वो अपनी अदाओं से कयामत करतें हैं।
हमारी निगाहें उनके चहरे से हठतीं नही,
और वो हमारी निगाहों की शिकायत करतें हैं।


सावन की बूंदों में झलकती है उनकी तस्वीर,
आज फिर भीग बैठे हैं उन्हें पाने की चाहत में।


चाह कर भी जुदा न रह सकोगे,
खफा हो के भी न खफा रह सकोगे,
हम रिश्ता ही कुछ ऐसे निभाएंगे,
कि आप हमारे बिना न रह सकोगे।


किसी ने मोहब्बत लिखी,
तो किसी ने करार लिखा।
हमने अपने शेर में,
सिर्फ तेरा इंतजार लिखा।


इश्क़ भी हो हिजाब में हुस्न भी हो हिजाब में,
या तो ख़ुद आश्कार हो या मुझे आश्कार कर।


तू देख या न देख इसका गम नही,
पर तेरे न देखने की अदा किसी देखने से कम नही।


होती नहीं है मोहब्बत सूरत से,
मोहब्बत तो दिल से होती है,
सूरत उनकी खुद-ब-खुद लगती है प्यारी,
कदर जिनकी दिल में होती है


फिजा में महकती शाम हो तुम,
प्यार का छलकता जाम हो तुम,
सीने में छुपाये फिरते हैं,
मेरी जिंदगी का दूसरा नाम हो तुम।


कमाल की मोहब्बत थी मुझसे उसको,
अचानक ही शुरू हुई और,
बिना बताये ही खत्म हो गयी।


इश्क़ इक मीर भारी पत्थर है,
कब ये तुझ ना-तवाँ से उठता है।


तेरे नज़रों के तीर इतने शातिर है,
की पता ही नही चलता किस के खातिर हैं।


हम भी कुछ प्यार के गीत गाने लगे हैं,
जब से ख़्वाबों में मेरे वो आने लगे हैं।


सुकून मिलता है जब बात होती है,
हज़ार रातों में वो एक रात होती है,
निगाह उठा कर जब देखते हैं वो मेरी तरफ,
मेरे लिए वही पल पूरी कायनात होती है।


तड़प रहीं हैं मेरी साँसें तुझे महसूस करने को, खुशबू की तरह बिखर
जाओ तो कुछ बात बने।


इब्तिदा-ए-इश्क़ है रोता है क्या,
आगे आगे देखिए होता है क्या।


हर फैसला किया नही जाता सिक्का उछाल के,
ये दिल का मामला होता है जरा देख-भाल के
तुम क्या जानो हमे तुमसे कितनी मोहब्बत है,
कहो तो अभी रख दूँ अपना कलेजा निकल के।


तुझे ख्वाबो में पाकर दिल का करार खो जाता है,
जितना रोकूँ खुद को तुझ से प्यार हो ही जाता है।


तुम्हारी दुनिया में हम जैसे हजारों होंगे।
लेकिन मेरी दुनिया में,
तुम्हारे सिवा कोई नहीं है।


चाहत का क्या ..? किसी को भी चाह लें… मसला मोहब्बत का है,
सिर्फ एक से होती है..!!


लौट जाती है उधर को भी नज़र क्या कीजे,
अब भी दिलकश है तेरा हुस्न मगर क्या कीजे।


ख्वाइश है तुझे अपना बनाने की,
और कोई ख्वाइश नही इस दीवाने की,
शिकायत मुझे तुझसे नही खुदा से है,
क्या ज़रूरत थी तुझे इतना खूबसूरत बनाने की।


चाहु तो नाम लिख दू उसका अपनी हर शायरी के साथ
लेकिन फिर सोचता हूँ की
बहुत भोली है मेरी जान , कहीं बदनाम ना हो जाए


लफ्ज-ए-शायरी तो शायर ही जानें…
मुझें रूहानी इश्क़ है तुमसे मैं तो बस इतना जानू।


नाम तेरा ऐसे लिख चुके हैं,
अपने वजूद पर।
कि तेरा नाम कहीं भी सुन लु तो,
दिल धड़क जाता है।


हर बार हम पर इल्जाम लगा देते हो मुहब्बत का, कभी खुद से भी पूंछा
है इतनी खूबसूरत क्यों हो


अगर शरर है तो भड़के जो फूल है तो खिले,
तरह तरह की तलब तेरे रंग-ए-लब से है।


दीवाना हूँ तेरा मुझे इंकार तो नही,
कैसे मैं कह दूँ मुझे प्यार नही,
कुछ शरारत तो तेरी निगाहों की भी थी,
मैं अकेला इसका गुनहा गार तो नही।


रूठ गया वो खुदा भी हमसे ।
जब हमने अपनी हर दुआ में आपको मागा।


रेत पर लिख के मेरा नाम मिटाया न करो,
आँख सच बोलती है प्यार छुपाया न करो,
लोग हर बात का अफसाना बना लेते हैं,
सबको हालात की रुदाद सुनाया न करो।


तुमसे अच्छा तो,
हम चाँद से मोहब्बत कर लेते।
लाख दूर सही
पर नजर तो आता हैं।


आपसे रोज़ मिलने को दिल चाहता है, कुछ सुनने सुनाने को दिल चाहता
है, था आपके मनाने का अंदाज़ ऐसा, कि फिर रूठ जाने को दिल चाहता है।


ये क्या कि वो जब चाहे मुझे छीन ले मुझसे,
अपने लिए वो शख़्स तड़पता भी तो देखूँ।


धीरे से आकर हमारे दिल में उतर जाते हो,
खुशबू की तरह मेरी सांसो में बिखर जाते हो,
अब तो तुम्हारे इश्क में ये हाल हो गया है,
सोतें जागते बस तुम ही तुम नजर आते हो।


हमे फिर सुहाना नज़ारा मिला है,
क्योंकि जिंदगी में साथ तुम्हारा मिला है,
अब जिंदगी में कोई ख्वाइश नही रही,
क्योंकि हमे अब तुम्हारी बाहों का सहारा मिला है


चल चलें किसी ऐसी जगह जहाँ कोई न तेरा हो न मेरा हो,
इश्क़ की रात हो और…बस मोहब्बत का सवेरा हो।


तुम्हारे एक लम्हे पर भी हक नहीं मेरा,
ना जाने तू किस हक से,
मेरे हर लम्हे में शामिल है।


लिखना था कि
खुश हैं तेरे बगैर भी यहां हम,
मगर कमबख्त…
आंसू हैं कि कलम से
पहले ही चल दिए


एक शब गुजरी थी तेरे गेसुओं के छाँव में,
उम्र भर बेख्वाबियाँ मेरा मुकद्दर हो गयीं।


सफर वहीं तक जहाँ तक तुम हो,
नजर वहीं तक जहां तक तुम हो,
हज़ारों गुल देखें हैं गुलशन में हमने,
पर खुशबू वहीं तक जहां तक तुम हो।


आरजू ये है कि इज़हार-ए-मोहब्बत कर दें,
अल्फाज़ चुनते है तो लम्हात बदल जाते हैं।


अब हम न तुम्हे खोना चाहते हैं,
अब न तुम्हारी यादों में रोना चाहतें हैं,
बस तुम्हारा साथ मिले हमे हर पल,
अब बस इतनी सी बात तुमसे कहना चाहते हैं।


श्क की गहराईयो में खूब सूरत क्या है,
मैं हूं, तुम हो, और कुछ की जरूरत क्या है


मुझे पता है मेरी खुद्दारियां तुम्हें खो देगी।
मै भी क्या करू, मुझे मांगने की आदत नहीं।


उसकी मोहब्बत लाख छुपाई ज़माने से मैंने,
मगर आँखों में तेरे अक्स को छुपा न सका।


फूल खिलतें हैं बहारों का समा होता है,
ऐसे मौसम में ही तो प्यार जमा होता है,
दिल की बातें होठों से नही कहते हैं,
ये फ़साना तो निगाहों से बयां होता है।


वो तो शायरों ने लफ्जो से सजा रखा है,
वरना मोहब्बत इतनी भी हसीँ नही होती।


सफ़र वहीं तक है जहाँ तक हो तुम,
नज़र वहीं तक है जहाँ तक हो तुम,
हजारों फूल देखें हैं इस गुलशन में मगर,
खुशबू वहीं तक है जहाँ तक हो तुम।


किसी की जिंदगी सिर्फ दो वजह से बदलती है,
एक कोई बहुत खास इंसान उसकी जिंदगी में आ जाये,
दूसरा कोई बहुत खास इंसान उसकी जिंदगी से चला जाये।


माना कि तुम मेरे नहीं,
पर मुलाकात कर लो।
होठों से ना सही,
आँखों से ही बात कर लो।


अपने हाथों से यूँ चेहरे को छुपाते क्यूँ हो,
मुझसे शर्माते हो तो सामने आते क्यूँ हो,
तुम भी मेरी तरह कर लो इकरार-ए-वफ़ा अब,
प्यार करते हो तो फिर प्यार छुपाते क्यूँ हो?


जाने कब आपसे प्यार का इज़हार होगा,
जाने कब आपको हमसे प्यार जोगा,
गुजर रही हैं आपकी ही याद में ये रातें,
जाने कब आपको भी हमारा इंतज़ार होगा।


तुझे क्या पता कि मेरे दिल में,
कितना प्यार है तेरे लिए,
जो कर दूँ बयान तो,
तुझे नींद से नफरत हो जाए!


शरीक-ए-बज्म होकर यूँ उचटकर बैठना तेरा,
खटकती है तेरी मौजूदगी में भी कमी अपनी।


कर दे नज़रे करम मुझ पर,
मैं तुझपे ऐतबार कर दूँ,
दीवाना हूँ तेरा ऐसा,
कि दीवानगी की हद को पर कर दूँ,


सच्ची मोहब्बत कभी खत्म नहीं होती
वक़्त के साथ खामोश हो जाती है


कभी तुम आ जाओ ख्यालों में और मुस्कुरा दूँ मैं,
इसे गर इश्क़ कहते हैं तो हाँ मुझे इश्क़ है तुमसे।


जब किसी रात आपको किसी की याद सताए,
और ठंडी हवा आपके बालों को सहलाये,
तो अपनी आँखे बन्द करके सो जाना,
और चुपके से हम आपके ख्वाबो में आ जायें।


रोज वो ख़्वाब में आते हैं गले मिलने को,
मैं जो सोता हूँ तो जाग उठती है किस्मत मेरी।


हज़ार बार ली है तुमने तलाशी मेरे दिल की,
बताओ कभी कुछ मिला है इसमें प्यार के सिवा..!


सोचा था आज तेरे सिवा कुछ और सोचूं,
अभी तक इस सोच में हूँ, कि और क्या सोचूं?


छू जाते हो तुम मुझे हर रोज एक नया ख्वाब बनकर,
ये दुनिया तो खामखां कहती है कि तुम मेरे करीब नहीं।


न गुलफाम चाहिये, न कोई सलाम चाहिये,
मोहब्बत का बस कोई पैगाम चाहिये,
और जिसको पीकर उड़ जायें होश हमारे,
हमारे ल्वजो को तो ऐसा ज़ाम चाहिये।


प्यार मोहब्बत आशिकी.ये बस अल्फाज थे.
मगर.. जब तुम मिले तब इन अल्फाजो को मायने मिले.


उस शख्स से बस इतना सा ताल्लुक़ है फ़राज़,
वो परेशां हो तो हमें नींद नहीं आती।


ज़िक्र करता है दिल सुबह शाम तेरा,
गिरते हैं आँसू बनता है नाम तेरा,
किसी और को क्यों देखे ये आँखें,
जब दिल पे लिखा सिर्फ नाम तेरा।


यूँ शक ना किया करो मेरी मोहब्बत पे,
तुम्हारे बिना भी हम तुम्हारे रहते हैं।


खींच लेती है हर बार मुझे तेरी मोहब्बत,
वरना मैं बहुत बार मिला हूँ आखिरी बार तुझसे।


आप दौलत के तराज़ू में दिलों को तौलें,
हम मोहब्बत से मोहब्बत का सिला देते हैं।


कभी हँसा देते हो तुम,कभी रुला देती हो तुम,
कभी कभी नींद से जगा देती हो तुम,
लेकिन जब भी हमे दिल से याद करती हो,
तो सच में हमारी जिंदगी का एक पल बड़ा देती हो तुम।


अपनी मोहब्बत पे इतना भरोसा तो है मुझे,
मेरी वफायें तुझे किसी और का होने न देंगी।


खामोश रास्तो में तेरा साथ चाहिए,
तन्हा है मेरा हाथ तेरा हाथ चाहिए।


पता नहीं ये प्यार है या मेरी नादानी,
बस हल पल तुम्हे याद करना,
मुझे अच्छा लगता है।


ना मैं ख्याल में तेरे ना मैं गुमान में हूँ,
यकीन दिल को नहीं है कि इस जहान में हूँ,
खुदाया रखियेगा दुनिया में सरफ़राज़ मुझे,
मैं पहले इश्क़ के पहले इम्तिहान में हूँ


​खयालों में ​उसके मैंने बिता दी ज़िंदगी सारी,
​​इबादत कर नहीं पाया खुदा नाराज़ मत होना​।


खुदासे बस आपकी ख़ुशी मांगतें हैं,
दुआओं में आपकी हसीं मांगतें हैं,
सोचतें हैं आपसे क्या मांगे,
चलो आपसे उम्र भर की मोहब्बत मांगतें हैं।


कभी सभले तो कभी बिखर गए हम,
अब तो खुद में ही सिमट गए हम,
यूँ तो ज़माना खरीद नहीं सकता हमें,
मगर प्यार के दो लफ्जों से बिक गए हम।


खुशबू की शुरुआत बहार से होती है,
दिन की शुरुआत तेरे दीदार से होती है,
हमे इंतज़ार है तेरी सदा का क्यूंकि,
प्यार की शुरुआत इजहार से होती है


शायराना सी हो जाती है फिजाएं खुद-ब-खुद,
तेरे करीब होने का जब-जब एहसास होता है।

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