Guru Gobind Singh



Guru Gobind Singh ji Jayanti Life, Facts, Quotes, Wishes and Messages

“I fall at the feet of those who meditate on the Truest of the True.”

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"He alone is a man who keeps his word, Not that he has one thing in the heart, and another on the tongue."

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अगर आप केवल भविष्य के बारे में सोचते रहेंगे तो वर्तमान भी खो देंगे.

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सवा लाख से एक लड़ाऊं,

चिड़ियन ते मैं बाज तुड़ाऊं,

तबै गुरु गोबिंद सिंह नाम कहाऊं ||

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The greatest comforts and lasting peace are obtained, when one eradicates selfishness from within. ~ Guru Gobind Singh

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“He alone is a man who keeps his word:
Not that he has one thing in the heart, and another on the tongue.”

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The greatest comforts and lasting peace are obtained, when one eradicates selfishness from within.

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गुरु गोबिंद सिंह जी की पत्नियाँ, माता जीतो जी, माता सुंदरी जी और माता साहिबकौर जी थीं। बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह आपके बड़े साहिबजादे थे जिन्होंने चमकौर के युद्ध में शहादत प्राप्त की थीं। और छोटे साहिबजादों में बाबा जोरावर सिंह और फतेह सिंह को सरहंद के नवाब ने जिंदा दीवारों में चुनवा दिया था। युद्ध की दृष्‍टि से आपने केसगढ़, फतेहगढ़, होलगढ़, अनंदगढ़ और लोहगढ़ के किले बनवाएँ। पौंटा साहिब आपकी साहित्यिक गतिविधियों का स्थान था।

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गुरु गोबिंद सिंह का मूल नाम गोबिंद राय था। उनका जन्मस्थान पटना, बिहार बताया जाता है। उनके पिता का नाम गुरु तेग बहादुर और उनकी माता का नाम गुजरी देवी था। उनके बाल्यकाल के प्रथम चार वर्ष पटना में बीते। उसके बाद वर्ष 1670 में उनका परिवार पंजाब आ गया।

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आज गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती है. सिख धर्म के लोग गुरु गोबिंद सिंह जयंती को बहुत धूम-धाम से मनाते हैं. इस दिन घरों और गुरुद्वारों में कीर्तन होता है. खालसा पंत की झांकियां निकाली जाती हैं. इस दिन खासतौर पर लंगर का आयोजन किया जाता है.|

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बिहार के पटना साहिब गुरुद्वारा में संगतों की भारी भीड़ उमड़ती है. इस गुरुद्वारें में वो सभी चीजें मौजूद हैं जो जिसका इस्तेमाल गुरु गोविंद सिंह जी करते थे. यहां गुरु गोविंद की छोटी कृपाण भी मौजूद है जिसे वो हमेशा अपने पास रखते थे. इसके अलावा यहां गुरु गोंविद जी की खड़ाऊ और कंघा भी रखा हुआ है. यहां वो कुआं भी अब तक मौजूद है जिसका इस्तेमाल गुरु गोविंद सिंह जी की मां पानी भरने के लिए करती थीं.

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गुरु गोविंद सिंहजी केवल आदर्शवादी नहीं थे, बल्कि वे एक आध्यात्मिक गुरु थे जिन्होंने मानवता को शांति, प्रेम, एकता, समानता एवं समृद्धि का रास्ता दिखाया। वे व्यावहारिक एवं यथार्थवादी भी थे। उन्होंने अपने अनुयायियों को धर्म की पुरानी और अनुदार परंपराओं से नहीं बांधा बल्कि उन्हें नए रास्ते बताते हुए आध्यात्मिकता के प्रति व्यावहारिक दृष्टिकोण दिखाया।

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